भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में विकास के नित नए आयाम गढ़े जा रहे हैं। इसकी कड़ी में एक ओर कदम प्रदेश सरकार द्वारा उठाया गया है। मध्यप्रदेश के शहरी विकास को नई दिशा देते हुए सरकार ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की सीमा तय कर दी है। यह फैसला राजधानी और आसपास के जिलों के आर्थिक, औद्योगिक और रोजगार परिदृश्य को बदलने वाला माना जा रहा है।
12099 वर्ग किलोमीटर में फैला भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन देश के सबसे बड़े महानगरीय क्षेत्रों में शामिल होगा। इसमें रायसेन, विदिशा, राजगढ़, सीहोर और नर्मदापुरम जिले शामिल हैं। 2524 गांव, 30 तहसीलें और 12 नगरीय क्षेत्र इस क्षेत्र का हिस्सा होंगे। मंडीदीप, गोविंदपुरा, आईटी पार्क, आष्टा एग्रो प्रोसेसिंग और मोहासा जैसे औद्योगिक केंद्रों को इससे सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने इसका मानचित्र लॉन्च किया। इसके साथ ही इंदौर को अंडरग्राउंड मेट्रो की सौगात भी मिली। अनुमान है कि इस परियोजना से करीब 10 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बेहतर सड़क, रेल और मेट्रो कनेक्टिविटी से पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की सीमाएं हुईं तय, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जा किया विकास का नया नक्शा, 10 लाख रोजगार की जगी उम्मीद


