इन आत्महत्याओं के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?

मध्य प्रदेश। MP Board Result जारी होने के बाद कुछ छात्रों द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदमों ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया है। रिजल्ट के दबाव और मानसिक तनाव के चलते अलग-अलग जिलों से दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं, जिसने अभिभावकों और प्रशासन दोनों को चिंता में डाल दिया है।

छिंदवाड़ा: 10वीं की छात्रा ने की आत्महत्या

छिंदवाड़ा के परासिया इलाके में 17 वर्षीय छात्रा ने 10वीं में तीन विषयों में फेल होने के बाद आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि रिजल्ट देखने के बाद वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

उज्जैन: पुल से कूदी 12वीं की छात्रा

उज्जैन में 12वीं की छात्रा ने पूरक (सप्लीमेंट्री) आने के बाद मक्सी रोड ब्रिज से छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों की सतर्कता से उसकी जान बच गई, लेकिन हादसे में उसे गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल अस्पताल में उसका इलाज जारी है।

मुरैना: 12वीं के छात्र ने उठाया खौफनाक कदम

मुरैना में 12वीं में फेल होने से आहत एक छात्र ने कथित तौर पर खुद को गोली मार ली। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्र तीन विषयों में फेल था, जिससे वह तनाव में था।

रिजल्ट का दबाव या सिस्टम की कमी?

बता दें इस वर्ष 10वीं का परिणाम 73.42% और 12वीं का 76.01% रहा, आंकड़ों के लिहाज से यह संतोषजनक दिखाई देता है। लेकिन इन प्रतिशतों के पीछे छिपी दर्दनाक घटनाएं एक गहरी सच्चाई उजागर करती हैं। सवाल यह उठता है कि क्या हमारा शिक्षा तंत्र सिर्फ अंकों तक सीमित रह गया है, या वह छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत और असफलताओं का सामना करने के लिए भी तैयार कर पा रहा है?

 

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