कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शुक्रवार को अचानक धरती कांप उठी। दोपहर के वक्त आए तेज झटकों से लोग घबराकर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.5 दर्ज की गई। बता दें शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल किसी बड़े जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन कुछ इलाकों में हल्की दरारें और कंपन की शिकायतें सामने आई हैं। प्रशासन ने एहतियातन आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यम तीव्रता के भूकंप में सतर्कता जरूरी है, क्योंकि आफ्टरशॉक्स की संभावना बनी रहती है।
चिली में आई थी विनाशकारी त्रासदी
दिलचस्प संयोग यह है कि 27 फरवरी का दिन भूकंप के इतिहास में पहले भी दर्ज है। जानकारी के मुताबिक 27 फरवरी 2010 को दक्षिण अमेरिकी देश Chile में 8.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया था, जिसे आधुनिक इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में गिना जाता है। उस भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 35 किलोमीटर नीचे था और झटकों ने बड़े भूभाग को प्रभावित किया। कई शहरों में इमारतें ढह गईं, सड़कें फट गईं और बुनियादी ढांचा चरमरा गया। भूकंप के बाद आई सुनामी ने तबाही को और बढ़ा दिया। सैकड़ों लोगों की जान गई और लाखों लोग बेघर हो गए थे।
घबराएं नहीं, सतर्क रहें
वहीं भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि कोलकाता में आया झटका भले ही मध्यम श्रेणी का था, लेकिन इससे यह याद दिलाता है कि शहरी इलाकों में भूकंपीय सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है। वैज्ञानिकों ने सलाह देते हुए कहा कि- भूकंप के दौरान लिफ्ट का उपयोग न करें, खुले स्थान पर जाएं और मजबूत फर्नीचर के नीचे शरण लें। प्रशासन ने भी नागरिकों से संयम बनाए रखने और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन 27 फरवरी की तारीख ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया है कि प्रकृति की शक्ति के सामने मानव निर्मित ढांचे कितने नाजुक साबित हो सकते हैं।


