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SC में हाई-वोल्टेज बहस: IPAC-ED रेड पर कानूनी टकराव, SG तुषार मेहता ने दिया तीखा जवाब

दिल्ली। भारत का सर्वोच्च न्यायालय में उस वक्त तीखी बहस देखने को मिली,जब पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग जारी थी। मामला IPAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर प्रवर्तन निदेशालय की रेड और उससे जुड़े घटनाक्रम का है, जिसमें कोर्ट की कार्यवाही के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए गए। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि अदालत की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेंड न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा के खिलाफ है और इसे रोका जाना चाहिए।

SG तुषार मेहता का जवाब

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखा जवाब देते हुए कहा ‘मैं गरिमापूर्ण चुप्पी बनाए रखूंगा, मैं स्ट्रीट फाइटर की तरह व्यवहार नहीं कर सकता।’ उनके इस बयान ने कोर्टरूम का माहौल और गर्म कर दिया।

वहीं सुनवाई के दौरान जस्टिस पी. के. मिश्रा ने कहा  ‘अदालत के अंदर और बाहर की बातों की तुलना करना उचित नहीं है। कोर्ट की टिप्पणियां तुरंत मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं,और दोनों पक्ष इसका इस्तेमाल करते हैं-जिसे रोकना आसान नहीं है।‘

ED का बड़ा आरोप

SG मेहता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी खुद IPAC ऑफिस पहुंचीं और रेड के दौरान डिजिटल डिवाइस व अहम दस्तावेज हटा लिए। उन्होंने इसे कानून के शासन का उल्लंघन बताया और कहा कि यह कोई अलग घटना नहीं, बल्कि एक पैटर्न का हिस्सा है।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, मामला 8 जनवरी की उस रेड से जुड़ा है, जब ED ने IPAC ऑफिस और को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था। यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस के तहत की गई थी। ED का आरोप है कि रेड के दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई में बाधा डाली गई और सबूतों से छेड़छाड़ हुई।

यह मामला अब सिर्फ कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनावी माहौल में एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभर आया है। एक तरफ न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा पर सवाल है, तो दूसरी तरफ एजेंसियों की कार्रवाई और राज्य सरकार की भूमिका पर बहस तेज हो गई है।

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