इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में बुधवार तड़के एक दर्दनाक अग्निकांड में आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत की घटना सामने आई। जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रात करीब ढाई बजे एक इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट से आग लगी। घर में रखें दर्जन भर गैस सिलेंडर भी आग की चपेट में आए और स्थिति भयावह हो गई। सूचना है कि लगभग पांच सिलेंडरों में विस्फोट हुआ, जिससे मकान का एक हिस्सा ढह गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए, लेकिन घना धुआं और लपटों के कारण कोई अंदर प्रवेश नहीं कर सका। घर में मौजूद 11 लोगों में से चार को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि सात लोग आग और धुएं की चपेट में आ गए।
जानकारी के मुताबिक, यह मकान एक पुगालिया कारोबारी का है, जहां पारिवारिक कार्यक्रम के चलते रिश्तेदार भी ठहरे हुए थे। आग लगने के बाद बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे इलेक्ट्रॉनिक ताले नहीं खुल सके और लोग बाहर नहीं निकल पाए।
सुबह करीब पांच बजे दमकल और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। दरवाजे तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। प्रारंभिक जांच में रसायन सामग्री के संपर्क में आने से आग के और भड़कने की आशंका भी जताई जा रही है।
इस घटना से उठे सवाल
जब पूरे देश में एलपीजी गैस की किल्लत चल रही है और कालाबाजारी पर प्रशासन सख्त रुख अपनाए है, तो एक ही घर में दर्जनों सिलेंडर कैसे पहुंचे? क्या इस एंगल पर भी विचार और जांच करने की जरूरत नहीं है। क्या प्रशासन केवल गरीब लोगों के लिस सख्त कानून अपनाता है अमीरों के लिए नहीं यह गंभीर प्रशन है।


