मुम्बई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दामों के बाद सोन और चांदी के दामों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। आलम यह है कि एक सप्ताह में सोने में लगभग 30 फीसदी और चांदी में 50 फीसदी गिरावट रिकार्ड की गई। बीते साल दिसंबर में जहां सोने ने ऐतिहासिक उछाल के साथ उच्चतम मापदंड तय किए थे। वहीं अब 40 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में अभी और भी गिरावट देखी जा सकती है और यह आंकड़ा एक लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे जा सकता है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में चांदी करीब 75,00 रुपये प्रति किलोग्राम तो सोना करीब 29,00 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ।
देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को लगातार दसवें कारोबारी सत्र में सोने के भाव नीचे आए हैं। दिल्ली, मुंबई और पटना जैसे महानगरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की कीमतों में कमी देखी गई है, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों के बीच हलचल बढ़ गई है। मौजूदा समय में सोना 1 लाख 40 हजार प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है, वहीं चांदी भी 2 लाख 17 हजार पर पहुंच गई।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। जब डॉलर की कीमत बढ़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग कम होने लगती है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ता है। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीतियों ने भी सोने की चमक को कुछ कम कर दिया है।
हालांकि, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण भविष्य में सोने के दाम फिर से बढ़ सकते हैं। फिलहाल सोने की कीमत पिछले कई महीनों के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गई है। जानकारों की सलाह है कि निवेशकों को जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने के बजाय अंतरराष्ट्रीय संकेतों और मौसमी मांग पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।


