बैतूल। जिले के घोड़ाडोंगरी विकासखंड के ग्राम दानवाखेड़ा में एक बार फिर दूषित पेयजल के कारण स्वास्थ्य संकट गहरा गया है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ महीने पहले दूषित पानी पीने से फैली बीमारी (उल्टी-दस्त और संबंधित संक्रमण) के चलते दो नन्हे बच्चों की मौत हो गई थी। अब गांव में खुजली का प्रकोप फिर से फैल गया है, जिससे खासकर आदिवासी बच्चों में डर का माहौल है।ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में न तो पक्की सड़क है, न बिजली की व्यवस्था और न ही शुद्ध पेयजल का कोई स्थायी इंतजाम। पहले की घटना में दो बच्चों की मौत के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें कीं, ज्ञापन दिए और आवेदन किए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ आश्वासनों तक सीमित रही। स्वास्थ्य विभाग की टीम दिसंबर 2025 में गांव पहुंची थी, जहां उन्होंने बीमारों का इलाज किया, लेकिन समस्या की जड़—दूषित पानी का स्रोत—अभी तक नहीं सुधारा गया।स्थानीय लोग बताते हैं कि हैंडपंप या अन्य स्रोतों से निकलने वाला पानी गंदा और दूषित है, जिससे त्वचा रोग, खुजली और अन्य संक्रमण फैल रहे हैं। प्रशासन की लापरवाही से गांववासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वे मांग कर रहे हैं कि तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए, हैंडपंप या जल स्रोतों की जांच हो और स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि और कोई मासूम जान न जाए।यह घटना ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। जिला प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।


