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इंदौर में जहरीले पानी का कहरः भागीरथपुरा में 8 मौतें, 100 से अधिक बीमार, तीन अफसरों पर गिरी गाज

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी ने जनजीवन को झकझोर दिया है। भागीरथपुरा इलाके में जहरीला पानी पीने से आठ लोगों की मौत हो चुकी है और सौ से अधिक लोग बीमार पड़े हैं। प्रशासनिक लापरवाही, सस्पेंशन और सियासी आरोपों के बीच पूरा शहर सदमे में है।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। करीब 2000 की आबादी वाली इस बस्ती में अचानक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टी, तेज पेट दर्द, दस्त और बेहोशी की शिकायतों के बाद सैकड़ों लोग अस्पतालों तक पहुंचे। अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। वर्तमान में अलग-अलग अस्पतालों में 111 मरीज भर्ती बताए जा रहे हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
सरकार ने उठाए ठोस कदम
प्रशासन के अनुसार, आधिकारिक तौर पर तीन मौतों की पुष्टि दूषित पानी से हुई है, जबकि अन्य मौतों का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों और विपक्ष का आरोप है कि असल आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे स्वास्थ्य और नगर निगम अमले को अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रभावित क्षेत्र में चार एंबुलेंस तैनात हैं और 14 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। जरूरत पड़ने पर 100 बेड की अतिरिक्त व्यवस्था भी की गई है।
सरकारी अमले की खुली नींद
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि जांच में सामने आया है कि पानी की मुख्य लाइन में एक स्थान पर ड्रेनेज और सीवरेज का पानी मिल गया था। उस स्थान को चिन्हित कर लिया गया है और लाइन को दुरुस्त करने का काम जारी है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह घटना नगर निगम की नैतिक जिम्मेदारी है और इंदौर जैसे शहर में ऐसी लापरवाही बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महापौर ने कहा कि छह महीने पहले भी गंदे पानी की शिकायतें मिली थीं, जिन पर सुधार के निर्देश दिए गए थे।
मुख्यमंत्री ने अपनाया कड़ा रुख, तीन को किया बर्खास्त
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीर मानते हुए कड़ा कदम उठाया है। जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को निलंबित कर दिया गया है, जबकि पीएचई के प्रभारी उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव को सेवा से बर्खास्त किया गया है। साथ ही आईएएस नवजीवन पंवार के नेतृत्व में जांच समिति गठित की गई है, जो यह जांच करेगी कि समय पर पाइपलाइन क्यों नहीं बदली गई और टेंडर के बावजूद काम क्यों रुका रहा।

विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है और सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जा रहा है। इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। जवाब में महापौर ने विपक्ष से राजनीति से ऊपर उठकर संवेदनशीलता दिखाने की अपील की है। फिलहाल, भागीरथपुरा में दहशत का माहौल है और पूरा शहर एक सवाल पूछ रहा है, क्या यह त्रासदी टाली जा सकती थी?

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