Monday, November 2, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsसूरजकुंड मेला हादसा:24 घंटे भी नहीं बीते, हादसे की जगह बदली, हरी...

सूरजकुंड मेला हादसा:24 घंटे भी नहीं बीते, हादसे की जगह बदली, हरी कालीन बिछी, नई राइड खड़ी!

उत्तर प्रदेश। फरीदाबाद के प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हादसे को अभी एक दिन भी पूरा नहीं हुआ था कि जिस जगह सुनामी झूला गिरा था, वहां का पूरा स्वरूप बदल दिया गया। घटनास्थल से न केवल टूटे झूले के सभी अवशेष हटा दिए गए, बल्कि वहां हरी कालीन बिछाकर एक नई राइड भी स्थापित कर दी गई। इस जल्दबाज़ी ने जांच की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

जांच से पहले क्यों बदली गई साइट?

प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ADC) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है और झूले के इंचार्ज के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि- जांच पूरी होने से पहले घटनास्थल को क्यों बदला गया? क्या फॉरेंसिक जांच के लिए साइट को सुरक्षित रखा गया था?क्या यह कदम सबूतों को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया?

एफआईआर में लापरवाही की पुष्टि

एफआईआर के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसा झूला संचालक कंपनी के मालिक सरबजीत सिंह (निवासी सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) और उसके कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही का नतीजा था। आरोप है कि झूले के संचालन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ गई।

एक पुलिस अधिकारी की गई जान और 13 घायलों का इलाज जारी

इस दुर्घटना में मेले में तैनात इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की जान चली गई। हादसे के तुरंत बाद वे मौके पर पहुंचे और झूले में फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुट गए। रेस्क्यू के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। हादसे में कुल 13 लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

डीजीपी का बयान

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंगल ने इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुलिस विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बताया कि- शहीद अधिकारी के परिवार को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता और विभागीय नियमों के अनुसार सभी लाभ दिए जाएंगे।

जहां एक ओर हादसे की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर घटनास्थल को जल्दबाज़ी में बदल देना प्रशासन की मंशा पर सवालिया निशान लगा रहा है।
अब देखना यह होगा कि जांच समिति इस मामले में क्या निष्कर्ष निकालती है और जिम्मेदारों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।

 

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन