मॉस्को। रूस ने अमेरिका पर भारत समेत कई देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का कहना है कि- वॉशिंगटन ऊर्जा बाजार पर नियंत्रण हासिल करने के लिए राजनीतिक और आर्थिक दबाव का सहारा ले रहा है, जिससे भारत जैसे देशों को महंगे विकल्प अपनाने पर मजबूर किया जा रहा है।
रूस का कड़ा बयान
रूस की यह प्रतिक्रिया अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है। हालांकि, रूस ने इस दावे को आधारहीन बताते हुए अमेरिकी नीति पर सीधा हमला बोला है। विदेश मंत्री ने कहा कि- अमेरिका टैरिफ, प्रतिबंध और प्रत्यक्ष रोक जैसे हथकंडों के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पकड़ बनाना चाहता है। उनके मुताबिक, यह रणनीति निष्पक्ष व्यापार के सिद्धांतों के खिलाफ है और इसका मकसद आर्थिक वर्चस्व कायम करना है।
यूक्रेन समझौते के बावजूद लगाए गए नए प्रतिबंध
साथ ही लावरोव ने दावा किया कि पिछले साल अलास्का में हुई बातचीत के दौरान रूस ने यूक्रेन को लेकर अमेरिका के प्रस्तावों को स्वीकार किया था। इसके बावजूद, वॉशिंगटन ने मॉस्को पर नए प्रतिबंध थोप दिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खुले समुद्र में रूसी टैंकरों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां की जा रही हैं, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन हैं।
भारत और अन्य देशों पर सस्ते रूसी तेल से दूरी बनाने का दबाव
साथ ही रूस का कहना है कि- अमेरिका भारत, चीन, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों को किफायती रूसी ऊर्जा संसाधन खरीदने से रोकना चाहता है। इसके बदले इन देशों पर अत्यधिक कीमतों पर अमेरिकी एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। लावरोव के अनुसार, यह पूरी रणनीति ऊर्जा मार्गों पर नियंत्रण पाने की कोशिश है।
रूस का संदेश: सहयोग के लिए दरवाजे खुले रहेंगे
सर्गेई लावरोव ने साफ किया कि- इन तमाम चुनौतियों के बावजूद रूस भारत सहित सभी साझेदार देशों के साथ सहयोग बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में अमेरिका खुद व्यापार और सहयोग के रास्ते में कृत्रिम बाधाएं खड़ी कर रहा है, लेकिन रूस बहुपक्षीय सहयोग के पक्ष में खड़ा रहेगा।


