भोपाल। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी अब सिर्फ सप्लाई इश्यू नहीं रही, बल्कि यह बड़ा पॉलिटिकल फ्लैशपॉइंट बन चुका है। राजधानी के कई इलाकों में होटल, ढाबे और छोटे फूड बिज़नेस गैस की अनियमित आपूर्ति से जूझ रहे हैं, जिससे रोज़मर्रा का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसी बीच विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए सरकार पर मैनेजमेंट फेलियर के आरोप लगाए हैं।
5-5 किलो कोयला वितरित
जानकारी के मुताबिक, बरखेड़ा पठानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक अलग अंदाज़ में विरोध दर्ज कराया। हाथ ठेलों और कंधों पर बोरे लेकर कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और उन दुकानों तक पहुंचे जो गैस सिलेंडर की कमी के कारण बंद पड़ी थीं। यहां दुकानदारों को प्रतीकात्मक तौर पर 5-5 किलो कोयला वितरित किया गया, जिसे कांग्रेस ने “ग्राउंड रियलिटी का सिम्बॉलिक प्रदर्शन” बताया।
इस पूरे अभियान का नेतृत्व रविंद्र साहू ने किया। उन्होंने कहा कि गैस संकट ने सबसे ज्यादा छोटे व्यापारियों को झटका दिया है- चाय-नाश्ते की दुकानें, ढाबे और लोकल फूड आउटलेट्स सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों पर तो बिज़नेस ऑपरेशंस पूरी तरह ठप होने की कगार पर हैं, जिससे रोज़ कमाने-खाने वाले लोगों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।
मैनेजमेंट में गड़बड़ी- कांग्रेस
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सप्लाई चेन मैनेजमेंट में गड़बड़ी और वितरण व्यवस्था की कमजोरी के कारण यह स्थिति बनी है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सरकार इस संकट को अस्थायी बताते हुए स्थिति सामान्य करने का दावा कर रही है।
गैस सिलेंडर की कमी से उपजा यह विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है, जहां एक तरफ विपक्ष इसे जनजीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है, वहीं सरकार पर जवाबदेही का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।


