तेहरान | ईरान में आर्थिक संकट के चलते शुरू हुए प्रदर्शनों ने अब पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में महंगाई, रियाल की गिरती कीमत और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शन अब 100 से ज्यादा शहरों में फैल चुके हैं, और स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।
हिंसा बढ़ी, पुलिस अधिकारी की हत्या, राष्ट्रीय झंडा फाड़ा गया;
प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। सरकारी मीडिया फार्स न्यूज के अनुसार, तेहरान में एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। वहीं, ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय झंडा फाड़ दिया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
मानवाधिकार संगठनों जैसे ह्यूमन राइट्स वॉच और ईरान ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 45 प्रदर्शनकारी और आम नागरिक मारे गए हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। इसके अलावा 2,270 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
रेजा पहलवी की अपील से प्रदर्शन और तेज;
ये प्रदर्शन निर्वासित युवराज रेजा पहलवी (ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे) की हालिया अपील के बाद और तेज हुए हैं। अमेरिका में रह रहे रेजा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने और एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की थी। प्रदर्शनकारियों में “यह आखिरी लड़ाई है, शाह पहलवी लौटेंगे” जैसे नारे भी सुनाई दे रहे हैं।
आर्थिक संकट की जड़: रियाल का रिकॉर्ड गिरावट;
प्रदर्शनों की मुख्य वजह देश की बदहाल अर्थव्यवस्था है। दिसंबर 2025 में ईरानी रियाल गिरकर लगभग 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत आधी हो चुकी है।
इसके अलावा, 2026 के बजट में प्रस्तावित 62% टैक्स बढ़ोतरी ने लोगों का गुस्सा और भड़का दिया है। GenZ युवा सबसे ज्यादा आक्रोशित हैं, जो आर्थिक बदहाली से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
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