नई दिल्ली। लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद, इंजीनियर और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय ने उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई हिरासत से जुड़ी थी, जिसे अब सरकार ने वापस ले लिया है। वहीं सरकार का कहना है कि यह फैसला लद्दाख क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा सभी पक्षों के साथ सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला
बता दें केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि सरकार लद्दाख में शांतिपूर्ण माहौल बनाने और स्थानीय लोगों के साथ विश्वास बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, लद्दाख के विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले से गठित उच्च स्तरीय समिति सहित अन्य मंचों के माध्यम से संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा।
लद्दाख में चल रहा है संवैधानिक दर्जे का मुद्दा
दरअसल, लद्दाख में पिछले कुछ समय से राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल करने और स्थानीय लोगों को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। इस आंदोलन में सोनम वांगचुक भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अनशन के माध्यम से अपनी मांगें उठाई हैं।
विरोध प्रदर्शनों के बाद हुई थी हिरासत
गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में लेह में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया था। इसी सिलसिले में प्रशासन ने सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया था और बाद में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत राजस्थान की जोधपुर जेल में भेज दिया गया था। सरकार का तर्क था कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया था।


