दिल्ली। देश में मोबाइल रिचार्ज प्लान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। Aam Aadmi Party के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने संसद में टेलीकॉम कंपनियों के 28 दिन वाले प्रीपेड रिचार्ज प्लान पर सवाल उठाते हुए इसे आम उपभोक्ताओं के साथ “छिपा हुआ खेल” बताया। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 125 करोड़ मोबाइल यूजर्स हैं और इनमें से करीब 90% लोग प्रीपेड कनेक्शन इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों की रिचार्ज नीति सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं को प्रभावित करती है।
12 महीने का साल, लेकिन 13 बार रिचार्ज!
संसद में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि- एक साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन टेलीकॉम कंपनियों के 28 दिन के प्लान के कारण यूजर्स को साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है। अगर गणित लगाया जाए तो- 28 दिन × 13 = 364 दिन, यानी कंपनियां यूजर्स को महीने जैसा अनुभव देती हैं, लेकिन असल में अवधि 30–31 दिन नहीं बल्कि 28 दिन की होती है। इससे साल भर में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।
इनकमिंग कॉल बंद होने का मुद्दा भी उठाया
सांसद ने प्रीपेड यूजर्स की दूसरी बड़ी समस्या भी संसद में रखी। उनका कहना था कि जब रिचार्ज की वैधता खत्म हो जाती है तो कई मामलों में इनकमिंग कॉल्स भी बंद हो जाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति के पास बैलेंस खत्म हो गया है तो कम से कम इनकमिंग कॉल की सुविधा तो जारी रहनी चाहिए, क्योंकि यह एक बुनियादी संचार सेवा है।
बाकी सभी बिलिंग 30–31 दिन, मोबाइल प्लान 28 दिन क्यों?
राघव चड्ढा ने यह भी कहा कि दुनिया में लगभग हर तरह की बिलिंग कैलेंडर महीने (30 या 31 दिन) के हिसाब से होती है। उदाहरण के तौर पर-
- सैलरी महीने के हिसाब से मिलती है
- घर का किराया हर महीने देना होता है
- बैंक की EMI भी महीने के आधार पर होती है
- बिजली, पानी और गैस के बिल भी मासिक आधार पर आते हैं
लेकिन इसके बावजूद टेलीकॉम कंपनियां 28 दिन के प्लान बेचती हैं, जिससे साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।
सरकार और नियामक से हस्तक्षेप की मांग
सांसद ने सरकार और टेलीकॉम रेगुलेटर से अपील की कि इस व्यवस्था की समीक्षा की जाए और उपभोक्ताओं के हित में कैलेंडर महीने (30 दिन) वाले प्लान को बढ़ावा दिया जाए। भारत में टेलीकॉम सेक्टर को रेगुलेट करने वाली संस्था Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) से भी इस मामले में दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
यूजर्स के बीच भी छिड़ी बहस
इस मुद्दे के उठने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स का कहना है कि 28 दिन वाले प्लान से कंपनियों को अतिरिक्त कमाई होती है, जबकि कुछ लोगों का तर्क है कि यह टेलीकॉम इंडस्ट्री की पुरानी बिलिंग प्रणाली है।
अब देखना होगा कि सरकार और रेगुलेटरी एजेंसियां इस मामले में कोई नई नीति या बदलाव लाती हैं या नहीं।


