शिकारियों ने जहर देकर किया बाघ का शिकार, गहरी नींद में सोता रहा वन अमला

प्रतीकात्मक फोटो

भोपाल। वन विभाग वन्य जीवों की सुरक्षा कितनी मुश्तैदी से कर रहे हैं इसकी बानगी सतपुड़ा बाघ अभयारण्य से सामने आई है। जहां प्रदेश सरकार वन और वन्यजीवों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए तत्पर है और करोड़ों की राशि पानी की तरह बहा रही है। वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के जिम्मेदारों की गहरी नींद कहें या लापरवाही ने एक ओर बाघ को शिकारियों की बलि चड़ा दिया। लापरवाही की कलई तब खुल गई जब सामने आया कि मृत मिले बाघ ने लाइव लोकेशन यंत्र पहना हुआ था, बावजूद इसके उसका शव 24 दिनों तक जंगल में पड़ा रहा। लेकिन अधिकारियों को पता तक नहीं चला।
नर्मदापुरम के सतपुड़ा बाघ अभयारण्य में एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। छिंदवाड़ा जिले की सीमा से लगे क्षेत्र में एक नर बाघ का शव मिला है, बताया जा रहा है कि यह  कई दिन पुराना है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि बाघ की लोकेशन पता करने उसे रेडियो कॉलर यंत्र लगे थे फिर भी वनअमले के पास बाघ की स्थिति का पता नहीं चला। जब यंत्र हटाने की अनुमति मिली और दल मौके पर पहुंचा, तब इस घटना का खुलासा हुआ।
जहर देकर किया गया बाघ का शिकार
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि शिकारियों ने बाघ को जहर देकर मारा था। साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उन्होंने बाघ के गले में लगे रेडियो कॉलर यंत्र को जलाकर नष्ट कर दिया ताकि संकेत (सिग्नल) मिलना बंद हो जाए। खोजी कुत्तों की सहायता से टीम मुख्य आरोपी के खेत तक पहुंची, जहां बाघ का अवशेष बरामद हुआ। गौरतलब हो कि इस क्षेत्र में अफीम की अवैध खेती की खबरें भी पहले सामने आ चुकी हैं।
पांच आरोपी पहुंचे जेल
अभयारण्य अधिकारियों के अनुसार, इस गंभीर मामले में मुख्य आरोपी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, इस घटना ने अभयारण्य की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि 24 दिनों तक बाघ का लापता रहना प्रबंधन की कार्यप्रणाली में बड़ी खामी को दर्शाता है।
मामला संदिग्ध
मामले में पांच आरोपियों को जेल भेजकर विभाग अपनी पीठ थपथपा रहा है। लेकिन इस पूरे मामले में उन जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाही नहीं की गई जो मूल रूप से जिम्मेदार हैं। क्या वाकई शिकारियों की चहलकदमी प्रतिबंधित क्षेत्र में होना इतना आसान है? सुरक्षा कर्मियों बाघ को लगाए गए सूचना यंत्र का कोई संकेत नहीं मिलने पर समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए? कुल मिलाकर यह पूरा मामला संदिग्ध है इसकी गहराई से जांच होना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *