कच्ची शराब ने ली जबलपुर क्षेत्र में ली 19 लोगों की जान, मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान

जबलपुर। जिले में कच्ची और अवैध शराब ने एक बार फिर जानलेवा रूप दिखाया है। बीते छह महीनों में 19 लोगों की मौत के बाद मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन से जवाब तलब किया है। इस बीच पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने अवैध शराब के नेटवर्क पर बड़ी चोट की है।
कच्ची और अवैध शराब से हो रही मौतों ने जबलपुर प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सिंधी कैंप, मदार टेकरी और बाबा टोला क्षेत्रों में बीते छह महीनों में 19 लोगों की जान जाने के बाद मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने इस गंभीर मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कलेक्टर से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है।
मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में लंबे समय से खुलेआम कच्ची और अवैध शराब की बिक्री हो रही थी, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इन इलाकों में मुख्य रूप से आर्थिक रूप से पिछड़ी आबादी निवास करती है, जो सस्ती शराब के जाल में फंसकर अपनी जान गंवा रही है।
मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने देर रात तक ताबड़तोड़ कार्रवाई की। घमापुर क्षेत्र में कच्ची शराब बनाने के कई ठिकानों पर दबिश दी गई, जहां से करीब 5 हजार लीटर लहान और कच्ची शराब जब्त कर मौके पर ही नष्ट की गई।
संयुक्त कार्रवाई के दौरान अवैध शराब की बिक्री में लिप्त 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अवैध शराब के पूरे नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
यह मामला केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा है। मानवाधिकार आयोग का हस्तक्षेप यह संकेत देता है कि यदि समय रहते प्रशासनिक निगरानी नहीं हुई, तो ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे।