पटवारी से लेकर प्रशासन तक चुप्पी, बेलगाम खुदाई से जलस्तर ध्वस्त — प्यास और प्रदूषण से जूझ रहे ग्रामीण
किरनापुर। भीषण गर्मी के बीच क्षेत्र में जलसंकट अब चेतावनी नहीं, बल्कि हकीकत बनता जा रहा है। कभी बहते रहने वाले नदी-नाले और झरने अब सूखकर खामोश हो चुके हैं। गांवों में पानी के लिए जद्दोजहद बढ़ती जा रही है और कई जगहों पर हालात ‘हाहाकार’ जैसे बनते दिख रहे हैं।
इस पूरे संकट के पीछे इट भट्टों की मनमानी और अवैध उत्खनन को बड़ी वजह बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जा रही है। जलस्रोतों के आसपास की जमीन को खोखला कर दिया गया है, जिससे नमी खत्म हो रही है और भूजल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है।

हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की नजरों के सामने हो रहा है। क्षेत्र का हल्का पटवारी, जिसकी जिम्मेदारी राजस्व भूमि और गतिविधियों पर नजर रखना है, वह भी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यह लापरवाही है या मिलीभगत?
दूसरी ओर, भट्टों और वाहनों की लगातार आवाजाही से उड़ रही धूल ने पूरे इलाके को अपने आगोश में ले लिया है। तेज गर्म हवाओं के साथ यह धूल लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन न तो जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई। इससे ठेकेदारों के हौसले और बढ़ गए हैं और अवैध गतिविधियां बेखौफ जारी हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि इस तरह की लापरवाही पर तुरंत रोक नहीं लगी, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र गंभीर जल संकट और पर्यावरणीय आपदा की चपेट में आ सकता है, जिसका असर खेती, पशुपालन और आम जनजीवन पर पड़ेगा।


